अस्वीकरण
यह विधिक सलाह नहीं है। प्रणाली प्रारूप बनाती है; उसे पढ़ना, जाँचना और उसका उत्तरदायित्व लेना अधिकारी का कार्य है।
यह विधिक सलाह नहीं है
विधिआख्या एक साधन है, अधिवक्ता नहीं। इसके द्वारा तैयार कोई भी प्रारूप, विश्लेषण, सुझाव अथवा उद्धरण विधिक सलाह नहीं है, और इस प्रणाली के उपयोग से अधिवक्ता-मुवक्किल का कोई संबंध उत्पन्न नहीं होता।
किसी भी प्रारूप को न्यायालय, आयोग अथवा किसी प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने से पूर्व सक्षम विधि अधिकारी अथवा अधिवक्ता से जाँचवाना आवश्यक है। यह जाँच प्रणाली नहीं कर सकती, और करने का दावा भी नहीं करती।
प्रारूप स्वचालित सहायता से बनता है
प्रारूप तैयार करने में कृत्रिम बुद्धि (AI) का प्रयोग होता है। ऐसी प्रणालियाँ आत्मविश्वास के साथ ग़लत भी हो सकती हैं — तिथि उलट सकती हैं, संख्या बदल सकती हैं, और कभी ऐसा निर्णय उद्धृत कर सकती हैं जो उस रूप में विद्यमान न हो।
इसी जोखिम के कारण इस प्रणाली में तीन रोक लगाई गई हैं: प्रत्येक कथन का स्रोत अभिलेख में दिखाया जाता है; जिस कथन का स्रोत न मिले उसके साथ निर्यात रुक जाता है; और अपुष्ट उद्धरण प्रारूप में जाने ही नहीं दिया जाता। ये रोक सहायक हैं — मनुष्य के पढ़ने का विकल्प नहीं।
प्रत्येक प्रारूप के नीचे यह अंकित रहता है कि वह स्वचालित सहायता से बना है, और किस अभिलेख के आधार पर बना है।
परिणाम की कोई गारंटी नहीं
इस प्रणाली के उपयोग से किसी प्रकरण के परिणाम की कोई गारंटी नहीं दी जाती। न्यायालय का निर्णय, समय-सीमा का पालन, तथा प्रकरण की सफलता अथवा विफलता — इनमें से किसी का उत्तरदायित्व इस उत्पाद पर नहीं है।
प्रणाली द्वारा दिखाई गई कोई भी समय-सीमा अथवा नियत तिथि केवल स्मरण के लिए है। वैधानिक समय-सीमा की गणना तथा उसका पालन सदा संबंधित अधिकारी का उत्तरदायित्व है।
प्राधिकरणों से कोई संबद्धता नहीं
विधिआख्या एक स्वतंत्र, निजी उत्पाद है। यह नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे अथवा किसी अन्य प्राधिकरण, विभाग या सरकार का अंग नहीं है; उनके द्वारा संचालित, अनुमोदित, प्रायोजित अथवा समर्थित नहीं है; और उनका कोई आधिकारिक पटल नहीं है।
इस वेबसाइट अथवा प्रणाली में प्राधिकरणों, अधिनियमों तथा शासनादेशों के नाम केवल पहचान के लिए प्रयुक्त हैं। उनका उल्लेख किसी संबद्धता अथवा अनुमोदन का संकेत नहीं है।
इस प्रणाली में उपलब्ध शासनादेश, अधिसूचनाएँ तथा निर्णय उपयोगकर्ताओं द्वारा चढ़ाए गए हैं। उनकी प्रामाणिकता का अंतिम प्रमाण संबंधित विभाग का मूल राजपत्र अथवा अभिलेख ही है।
प्रारूप सदा प्राधिकरण की ओर से
यह प्रणाली प्राधिकरण के विधि प्रकोष्ठ के लिए बनी है और उत्तर सदा प्राधिकरण की ओर से तैयार करती है। यह याची, शिकायतकर्ता अथवा आवेदक की ओर से प्रारूप नहीं बनाती, और इसका उपयोग उस प्रयोजन के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
अंतिम संशोधन: 26 सितंबर 2026 · संचालक: BighaGaj